महाबली भीम की सम्पूर्ण जीवन कथा | जन्म से स्वर्गारोहण तक की कहानी
Bhima की जीवन कथा
भीम महाभारत के पाँच पांडवों में दूसरे भाई थे। उन्हें बल, साहस और पराक्रम का प्रतीक माना जाता है। उनका जन्म और जीवन अनेक अद्भुत घटनाओं से भरा हुआ है।
अध्याय 1: महाबली का जन्म
राजा Pandu की पत्नी Kunti को एक दिव्य मंत्र प्राप्त था, जिससे वे किसी भी देवता का आह्वान कर सकती थीं। पांडु के शापग्रस्त होने के कारण कुंती ने Vayu देव का आह्वान किया। उनके आशीर्वाद से भीम का जन्म हुआ।
जन्म लेते ही भीम असाधारण बलशाली थे। कहा जाता है कि एक बार कुंती की गोद से गिरने पर जिस चट्टान पर वे गिरे, वह चट्टान टूट गई, लेकिन भीम को कुछ नहीं हुआ।
प्राचीन भारत में Hastinapur नामक विशाल राज्य था। वहाँ राजा Pandu का शासन था। राजा पांडु पराक्रमी और धर्मप्रिय थे, किंतु एक शाप के कारण वे संतान उत्पन्न नहीं कर सकते थे।
उनकी पत्नी Kunti को एक दिव्य मंत्र प्राप्त था। इस मंत्र से वे किसी भी देवता का आह्वान कर सकती थीं। पांडु की इच्छा पर कुंती ने Vayu देव का स्मरण किया। वायु देव प्रकट हुए और उन्होंने वरदान दिया कि उनके अंश से एक ऐसा पुत्र जन्म लेगा जो संसार का सबसे बलशाली पुरुष होगा।
समय आने पर भीम का जन्म हुआ। जन्म के समय ही उनके शरीर में असाधारण शक्ति दिखाई देती थी। कथा के अनुसार, जब वे शिशु थे तो एक बार कुंती की गोद से फिसलकर एक चट्टान पर गिर पड़े। चट्टान टूट गई, लेकिन बालक भीम को खरोंच तक नहीं आई।
सभी ऋषि-मुनियों ने भविष्यवाणी की कि यह बालक आगे चलकर धर्म की रक्षा करेगा और अधर्म का नाश करेगा।
अध्याय 2: बचपन और दुर्योधन की ईर्ष्या
भीम अपने भाइयों में सबसे अधिक बलवान थे। उनके बड़े भाई Yudhishthira शांत और धर्मप्रिय थे, जबकि Arjuna धनुर्विद्या में निपुण थे।
भीम का स्वभाव सीधा था, लेकिन वे अन्याय बिल्कुल सहन नहीं करते थे। खेल-कूद में वे हमेशा कौरवों को हरा देते थे। विशेष रूप से Duryodhana को यह बात बिल्कुल पसंद नहीं थी।
धीरे-धीरे दुर्योधन के मन में भीम के प्रति घोर ईर्ष्या उत्पन्न हो गई। उसे लगने लगा कि यदि भीम जीवित रहे तो भविष्य में पांडवों को हराना असंभव होगा।
एक दिन दुर्योधन ने भीम को विष मिला भोजन खिलाया। भोजन करने के बाद भीम बेहोश हो गए। तब दुर्योधन और उसके साथियों ने उन्हें बाँधकर नदी में फेंक दिया।
लेकिन भाग्य को कुछ और ही मंजूर था।
अध्याय 3: नागलोक की अद्भुत यात्रा
बेहोश भीम नदी के बहाव के साथ गहराई में चले गए। वहाँ अनेक नागों ने उन्हें काटा।
दुर्योधन द्वारा दिए गए विष और नागों के विष ने एक-दूसरे का प्रभाव समाप्त कर दिया। भीम को होश आ गया। जागते ही उन्होंने नागों को पकड़-पकड़कर दूर फेंकना शुरू कर दिया।
नागराज के आदेश पर उन्हें नागलोक ले जाया गया। वहाँ उनके पूर्वजों से संबंध का पता चला। नागराज ने उनका स्वागत किया और उन्हें एक दिव्य पेय पिलाया।
उस दिव्य रस को पीकर भीम में दस हजार हाथियों का बल आ गया।
कुछ दिनों बाद वे वापस हस्तिनापुर लौटे। उन्हें जीवित देखकर दुर्योधन स्तब्ध रह गया।
अध्याय 4: गुरु द्रोण के आश्रम में शिक्षा
कुछ समय बाद पांडव और कौरव शिक्षा प्राप्त करने के लिए Drona के आश्रम पहुँचे।
द्रोणाचार्य ने सभी राजकुमारों को युद्धकला, गदायुद्ध, तलवारबाजी और नीति का ज्ञान दिया।
भीम विशेष रूप से गदायुद्ध में अद्वितीय थे। उनकी भुजाओं में अपार शक्ति थी। गुरु द्रोण स्वयं उनकी क्षमता देखकर आश्चर्यचकित हो जाते थे।
दूसरी ओर दुर्योधन भी गदा चलाने में कुशल था। दोनों के बीच प्रतिद्वंद्विता दिन-प्रतिदिन बढ़ती गई।
गुरु द्रोण समझते थे कि भविष्य में इन दोनों के बीच एक महान संघर्ष होगा।
अध्याय 5: लाक्षागृह का षड्यंत्र
जब पांडवों की लोकप्रियता बढ़ने लगी तो दुर्योधन और उसके मामा Shakuni चिंतित हो गए।
उन्होंने एक षड्यंत्र रचा।
पांडवों को एक सुंदर महल में रहने के लिए भेजा गया। यह महल लाख, घी और अन्य ज्वलनशील पदार्थों से बना था।
योजना यह थी कि रात में महल को आग लगाकर पांडवों को जीवित जला दिया जाए।
लेकिन विदुर ने गुप्त रूप से पांडवों को चेतावनी दे दी।
रात को आग लगते ही भीम ने अपनी माता और भाइयों को उठाया। उन्होंने अपनी विशाल शक्ति से सबको सुरक्षित सुरंग के रास्ते बाहर निकाला।
उस रात यदि भीम न होते तो पांडवों का अंत निश्चित था।
अध्याय 6: राक्षस हिडिंब का वध
जंगल में भटकते हुए पांडव एक घने वन में पहुँचे।
वहाँ एक भयानक राक्षस रहता था जिसका नाम Hidimba था।
उसे मनुष्यों का मांस खाने की आदत थी।
जब उसे पांडवों के आने का समाचार मिला तो उसने अपनी बहन Hidimbi को उन्हें पकड़कर लाने भेजा।
लेकिन हिडिंबी ने भीम को देखा और उनसे प्रेम करने लगी।
जब हिडिंब स्वयं वहाँ पहुँचा तो भीम और उसके बीच भयंकर युद्ध हुआ।
धरती काँप उठी। वृक्ष उखड़ गए। घंटों तक संघर्ष चलता रहा।
अंत में भीम ने राक्षस को उठाकर पटक दिया और उसका वध कर दिया।
यहीं से महाबली भीम की वीरता की ख्याति दूर-दूर तक फैलने लगी।
यह केवल भाग 1 है (लगभग 900+ शब्द)। पूरी 10,000 शब्दों की कथा में आगे:
- हिडिंबी विवाह
- घटोत्कच का जन्म
- बकासुर वध
- द्रौपदी स्वयंवर
- जरासंध वध
- वनवास की घटनाएँ
- हनुमान से भेंट
- कीचक वध
- महाभारत युद्ध के 18 दिन
- दुःशासन वध
- दुर्योधन वध
- स्वर्गारोहण
शामिल होंगे।
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